Monday, June 26, 2017

पेशेन्ट वह जो हमें पैशेन्स रखना यानि धैर्य रखना सिखाए



विवेकानन्द केन्द्र बीओआरएल चिकित्सालय, बीना, मध्य प्रदेश


 05 मई 2017

कर्मयोगी की भांति करें हर मरीज की सेवाः भानुदास

विके बीओआरएल चिकित्सालय स्टाफ की बैठक को किया संबोधित।

सब मिलकर कार्य करते हैं, इसलिए बढ रहे निरंतर आगेः डाॅ.कयाल

बीना। हाॅस्पिटल यानि हाॅस्पिटेलिटी अर्थात जहां पूरे आतिथ्य भाव से मरीजों का उपचार हो। पेशेन्ट वह जो हमें पैशेन्स रखना यानि धैर्य रखना सिखाए। अर्थात् हाॅस्पिटल में हर मरीज की सेवा ऐसे करें जैसे कि वह हमारा भगवान है। पूरे धैर्य पूर्वक कर्तव्यबुद्धि से हम मरीज की सेवा करें। मरीजों में यह विश्वास जागना चाहिए कि मैं यहां आकर उपचार और सेवा से पूरी तरह से स्वस्थ्य होकर ही लौटूंगा। यदि हमें ऐसा भाव जगाने में सफल होते हैं, तो हम निश्चित ही कर्मयोग के पथ पर अग्रसर सेवाभावी कार्यकर्ता होंगे। हमें निष्फल नहीं निष्काम भाव से सेवा करनी है। यदि हम अपने सेवाभावी गुण से सब मिलकर चमु के रूप में कार्य करें तो निश्चित ही हम एक ऐसे समाज का निर्माण कर पाएंगे जहां सभी तन,मन से स्वस्थ्य हों। तब यह भारत माता निश्चित ही जगदगुरू के पद पर आसीन होगी क्योंकि जब हर व्यक्ति स्वस्थ्य होगा तो समाज भी सदैव प्रगति की ओर अग्रसर होगा।

यह बात विवेकानन्द केन्द्र के राष्टीय महासचिव माननीय श्री भानुदास जी धाक्रस ने विवेकानन्द केन्द्र बीओआरएल चिकित्सालय, बीना के सभागार में मेडिकल व नाॅन मेडिको स्टाफ की बैठक में कही। माननीय भानुदास जी आगे कहा कि पूरे देश में 25 राज्यों में 830 से अधिक शाखाओं व प्रकल्प के माध्यम से हमें समाज के अंतिम छोर तक सच्ची सेवा के भाव को पहुंचाने के लिए प्रयासरत हैं। आज देश के सूदूर क्षेत्रों में विवेकानन्द केन्द्र कार्य कर रहा है। जहां सैकडों सेवाभावी जीवनव्रती, सेवाव्रती व स्थानीय कार्यकर्ता कार्य कर रहे है। उन्होने कार्यकर्ताओं से आव्हान किया कि वे सभी नित्यरूप से स्वामी विवेकानन्द  के विचारोें और आदर्श का पठन- चिंतन करें। जब हमारी विचार शैली में स्वामी विवेकानन्द आते हैं,तो हमारी जीवन शैली और भी व्यवस्थित हो जाती है। ऐसे में हमारे हाथों जो भी सेवा होगी व निश्चित ही सर्वे सन्तु निरामया अर्थात् समाज के हर वर्ग को निरोगी बनाने में सक्षम होगी।

बैठक में चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. राजकुमार कयाल ने कहा कि पिछले एक वर्ष से बेहद चुनौतिपूर्ण वातावरण में हम आगे बढे हैं। पूरे स्टाफ का भरपूर सहयोग रहा। आज पूरे क्षेत्र में चिकित्सालय की छवि बदली है। हम इसी तरह मिलकर आगे भी कार्य कर लोगों के बीच सकारात्मक स्वास्थ्य के प्रति एक वातावरण का निर्माण करेंगे। इस मौके पर वरिष्ठ मेडिसीन फीजिशियन डाॅ. सुब्रत अधिकारी ने कहा कि यह एक अनूठा संगठन है, जहां आध्यात्म और चिकित्सा दोनों साथ है। यहां के हर पेज पर लिखा वाक्य ’सेवा ही धर्म है’ हमें सतत प्रेरणा देता है। यहां बगैर भेदभाव के हमें गरीब और अमीर दोनों वर्गों को चिकित्सा सेवा मुहैया करा रहे है, यह प्रशंसनीय है। हम सबको स्वामी विवेकानन्द की वाणी नित्य पढनी चाहिए और संकल्प के साथ इस सेवा पथ पर अग्रसर रहना चाहिए।

बैठक में स्टाफ के विभिन्न सदस्यों ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर विवेकानन्द केन्द्र मध्यप्रांत के प्रांत प्रमुख श्री भंवर सिंह राजपूत, प्रांत संगठक आदरणीय रचना दीदी, के अलावा चिकित्सालय के चिकित्सक, पैरामेडिकल व नाॅन मेडिकल स्टाफ के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में अतिथियों का परिचय व संचालन चिकित्सालय के प्रशासनिक अधिकारी गिरीश कुमार पाल ने किया। इस मौके पर डाॅ सुब्रत अधिकारी, डाॅ संजय दूलावत, डाॅ आलोक त्यागी, रजनी मैसी, सुनीता पाण्डे, राहुल उदैनिया, धन्नालाल प्रजापति, नीरज जैन, कृष्ण कुमार साहू, नंदकिशोर रावत, अभिषेक सिंह भदौरिया, मनीष प्रजापति, हुलामनी रुद्रवा, रश्मि रजक, भारती कुशवाहा, पूनम रैकवार, राखी गरेवाल, रंजना अहिरवार, रीतेश रस्तोगी, दुष्यंत ठाकुर, जागृति बुन्देला, नरेन्द्र परिहार, वंदना तैलोरे, कमल रजक, आनंद चढ़ार आदि उपस्थित रहे।

प्रेषक
राखी गरेवाल,
कार्यालय लिपिक,
विके बीओआरएल चिकित्सालय,बीना,

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